ढिकाला बुकिंग मिनटों में फुल, सिस्टम पर सवाल क्या ‘परमिट माफिया’ की आहट?
रिपोर्टर मोहम्मद कैफ खान
रामनगर। उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के ढिकाला जोन में सफारी और नाइट स्टे परमिट बुकिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में ऑनलाइन बुकिंग खुलते ही कुछ ही मिनटों में सभी स्लॉट फुल हो जाने से पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। स्थानीय पर्यटन कारोबारियों और टूर ऑपरेटरों का कहना है कि जिस प्रक्रिया में सामान्य तौर पर कई चरणों जैसे पर्यटकों का पहचान पत्र ओटीपी और कोड की आवश्यकता होती है उसमें इतनी तेज़ी से बुकिंग होना व्यवहारिक रूप से कठिन प्रतीत होता है। ऐसे में तकनीकी गड़बड़ी या किसी संगठित तरीके से बुकिंग होने की आशंका जताई जा रही है। कुछ कारोबारियों ने यह भी आरोप लगाए हैं कि परमिट की मांग और आपूर्ति के अंतर का फायदा उठाकर कुछ लोग इसे ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन इससे कॉर्बेट की छवि पर असर पड़ने की चिंता जरूर सामने आ रही है। मामले को और गंभीर बनाते हुए फर्जी वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए ठगी की घटनाएं भी चर्चा में हैं जहां पर्यटकों से धनराशि लेने के बाद बुकिंग नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। यह पूरा मामला अब सिर्फ बुकिंग की समस्या नहीं बल्कि पर्यटन व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्थिति ऐसी ही रही तो आम पर्यटकों के लिए ढिकाला जोन में बुकिंग कर पाना लगभग असंभव हो सकता है। नियमों के अनुसार हर सप्ताह निर्धारित समय पर आगामी दिनों के लिए ऑनलाइन बुकिंग खोली जाती है लेकिन लगातार कुछ ही मिनटों में फुल हो जाना कई सवाल खड़े करता है। हालांकि बढ़ते विवाद के बीच संबंधित विभाग द्वारा मामले की जांच शुरू किए जाने की बात सामने आ रही है। अब देखना यह होगा कि जांच में क्या सामने आता है और क्या वाकई सिस्टम में कोई खामी है या फिर यह केवल मांग और सीमित संसाधनों का परिणाम है।
कॉर्बेट में सफारी का सपना अब सवालों के घेरे में है क्या जंगल का रोमांच सिस्टम के जाल में फंस रहा है?
ऑनलाइन बुकिंग सिंडिकेट


