पत्रकार सुरक्षा और संरक्षण को लेकर बिलासपुर में आयोजित अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर से आए पत्रकारों ने एक स्वर में मांग उठाई कि पत्रकार सुरक्षा विधेयक में जल्द संशोधन किया जाए। अधिवेशन में शामिल वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ लगातार दबाव और हमलों का सामना कर रहा है, लेकिन सरकारें अब तक पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाई हैं।
रिपोर्टर मोहम्मद कैफ खान
दिल्ली, भोपाल, महाराष्ट्र, उड़ीसा, राजस्थान, गोवा, गुजरात और उत्तर प्रदेश से आए वरिष्ठ पत्रकारों ने कहा कि पत्रकारों की कलम पर हमला दरअसल लोकतंत्र पर हमला है। वक्ताओं ने बताया कि देश के तीन राज्यों में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू तो हुआ है, मगर उसकी स्थिति बेहद असमान है जहां तमिलनाडु का कानून कुछ हद तक संतुलित है, वहीं छत्तीसगढ़ का कानून सबसे कमजोर माना जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में पत्रकार लगातार खतरे में हैं और सुधार की सख्त जरूरत है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि पत्रकारिता की आज़ादी और सुरक्षा तभी संभव है जब पत्रकार खुद एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ें। अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष जिग्नेश कालावाडिया ने कहा कि संगठन का एकमात्र उद्देश्य देशभर में एक समान पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करवाना है। उन्होंने बताया कि जिस तरह बड़ी संख्या में पत्रकार इस अधिवेशन में जुटे हैं, यह संदेश सरकार तक स्पष्ट रूप से पहुँचना चाहिए कि अब पत्रकार चुप नहीं रहेंगे।
राज्य स्तर के पदाधिकारियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बने वर्तमान सुरक्षा विधेयक में पत्रकारों की सुरक्षा से ज्यादा सरकारी अधिकारियों को सुरक्षा दी गई है जबकि असली खतरा पत्रकारों को है जो सच लिखने की कीमत चुका रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इस मांग पर ध्यान नहीं दिया तो प्रदेश के पत्रकार आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।
बिलासपुर में आयोजित इस राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के तमाम राज्यों से सैकड़ों पत्रकारों ने शिरकत कर एकजुटता का संदेश दिया और कहा अब वक्त आ गया है कि कलम की आवाज़ को दबाने वालों को करारा जवाब दिया जाए।


