राज्य आंदोलनकारी रईस अहमद के रोजगार पर संकट, प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
रिपोर्टर मोहम्मद कैफ खान
रामनगर। के खताड़ी क्षेत्र में पिछले करीब 40 वर्षों से संचालित एक खोखे को हटाने की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यह खोखा राज्य आंदोलनकारी और पेंशनधारक रईस अहमद की आजीविका का मुख्य साधन बताया जा रहा है।
इस मामले में उत्तराखंड सरकार के पूर्व मंत्री एवं चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानीय लोगों की शिकायत के आधार पर रईस अहमद के खोखे को हटाने की कोशिश की जा रही है, जो पूरी तरह अनुचित है।
धीरेंद्र प्रताप ने जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल से फोन पर बातचीत कर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने कहा कि रईस अहमद एक पुराने राज्य आंदोलनकारी हैं और आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में हैं। ऐसे में उनके एकमात्र रोजगार को समाप्त करना उनके लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए कार्रवाई की जाए और स्थानीय स्तर पर हो रहे कथित दुर्व्यवहार पर रोक लगाई जाए।
बताया गया कि जिलाधिकारी ने इस संबंध में एसडीएम रामनगर से बात कर न्यायोचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है इस मुद्दे पर अन्य राज्य आंदोलनकारियों चंद्रशेखर जोशी, प्रभात ध्यानी, नवीन नैथानी, इंदर सिंह मनराल और हरिमोहन सहित कई लोगों ने भी संयुक्त बयान जारी कर चिंता जताई है। उन्होंने प्रशासन से रईस अहमद के साथ हो रहे कथित अन्याय को रोकने की मांग की है।


